Aug/090
हमारी किरायेदार और उसकी बेटी
प्रेषक - जितेन्द्र सिंह
मैं अपने बालकनी में कुर्सी लगाकर बैठा हुआ कुछ पढ़ रहा था कि इतने में मुझे पानी गिरने की आवाज़ सुनाई पड़ी, जैसे कोई नहा रहा हो। मैंने खड़े होकर नीचे आँगन में देखा तो मेरे होश उड़ गए। मैंने देखा कि रानी (इंजीनियर की पत्नी) नहा रही थी और वह भी पूरी नंगी होकर। मैंने पहली बार किसी औरत को पूरा नंगा देखा था। मेरे रोम-रोम खड़े हो गए, और उसका नहाना पूरा होने तक मैं उसे देखता रहा। चूँकि मेरे घर के चारों और उँची दीवारें हैं इसलिए बाहर से तो कोई भी नहीं देख सकता, तो इसलिए स्त्रियाँ आँगन में नंगी नहा सकतीं थीं।
अब मैं रोज़ाना उसी बालकनी में चला जाता और जब तक वो नहाती, मैं उसे देखा करता। मुझे पहले से चुदाई के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न मैं यह जानता था कि चुदाई कैसे करते हैं। बस, पूरे बदन में एक अजीब सी हरक़त होती थी। मैं परेशान होने लगा कि मुझे यह क्या हो रहा है, और कुछ ही देर में सब शांत हो जाता था। एक दिन जब वह नहा रही थी और मैं उसे देख रहा था, तभी उसकी नज़र मुझ पर पड़ गई। मैं जल्दी से वहाँ से भाग कर अन्दर आ गया। मैं काफ़ी डर गया था कि अब वह मेरे घरवालों को सबकुछ बता देगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
कुछ दिन बीत गए। मैंने बालकनी की ओर जाना बन्द कर दिया। एक दिन रानी ने मुझे अपने घर बुलाया। मैं वहाँ गया, वह घर पर अकेली ही थी। उसकी बेटी कॉलेज गई थी और पति दौरे पर जिले से बाहर गए थे। मैं जब उसके घर गया तो उसने बैठने को कहा और अभी आने की बात कहकर अन्दर चली गई। कुछ ही देर बाद वो एक झीनी सी गाऊन पहनकर बाहर आई। गाऊन के अन्दर उसने कुछ भी नहीं पहना था। गाऊन के बाहर से सबकुछ दिखाई दे रहा था। मैंने अपनी नज़रें नीची कर लीं। वह मेरे बगल में आकर बैठ गई। उसने कहा, “आजकल तुम दिखाई नहीं देते हो, क्या बात है?”
“नहीं आँटी ऐसी कोई बात नहीं है। इन दिनों मैं कुछ ज़्यादा ही व्यस्त था।”
“अच्छा बताओ, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेण्ड है?” - उसने बात आगे बढ़ाने के लिए पूछा।
मैंने ना में सिर हिलाया, तो वह चौंक कर बोली, “क्या? इतने बड़े हो गए हो, अभी तक कोई गर्लफ्रेण्ड नहीं है? तब तो तुम्हें बड़ी परेशानी होती होगी।”
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Aug/090
यार! तेरी बीवी बड़ी मस्त है
प्रेषक - अमित/अनिता शर्मा
हमने इसमें कुछ नयापन लाने की सोची। उस दिन से हम लोगों ने साथ में ब्लू-फिल्म देखनी शुरु की और गन्दी बातें करनी भी शुरु की। पहले मेरी पत्नी लंड-चूत जैसे शब्द बोलने में भी कतराती थी, पर धीरे-धीरे वह ये बातें आराम से बोलने लगी। उस दिन से हमने अपने यौन-जीवन में एक नयापन का अहसास किया और हमें मज़ा भी आने लगा।
अनीता भी पहले से उलट खुलकर सेक्स करने लगी। पहले जिन सब कामों के लिए वह मना किया करती थी अब वे सारे काम वह ख़ुद ही करवाने-करने लगी। जैसे कि मुँह में लौड़ा लेना, और गांड मरवाना, मेरा वीर्य चेहरे पर लेना, उसे इन कामों में अब बड़ा मज़ा आने लगा था।
मैं आप लोगों को अपनी बीवी के बारे में थोड़ा बताता चलूँ। उसकी उम्र ३४ साल है, गोरा बदन, दूध की तरह, उसकी फ़िगर भी ३७-२९-३८ है और उसका क़द ५’ ५” है। मैंने कई बार लोगों को उसे टेढ़ी नज़रों से देखते हुए देखा है, तब मुझे बड़ा ही अजीब सा महसूस होता है, उन लोगों पर गुस्सा भी नहीं आता।
एक दिन मैंने अनीता से वेबकॅम पर सेक्स करने की बात की पर उसने मना कर दिया, लेकिन जब मैंने उससे कहा कि हम लोग अपना चेहरा नहीं दिखाएँगे तो वह मान गई। उस दिन से मैं ऐसे युगल की खोज में जुट गया जो हमारी तरह सोचते हों और एक दिन हमें ऐसा ही एक युगल मिल गया। हम लोगों ने शनिवार रात का समय तय किया कॅम पर सेक्स करने के लिए।
शनिवार रात जब बच्चे सो गए तो रात को ११ बजे, तय समयानुसार हम लोग इन्टरनेट पर मिले। दूसरा युगल था, आशीष ३७, और गीता ३३। वे भी हमारी तरह एक मध्यमवर्गीय परिवार से थे और सेक्स में नयापन चाहते थे। तो हम लोगों ने नेट से चैट शुरु की और धीरे-धीरे सेक्स की बातें करने लगे। जहाँ मैं गीता के नंगे शरीर …
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Jul/090
गर्लफ्रेंड के साथ पहली बार
प्रेषक - अरुण शर्मा
वो दोपहर ठीक २:३० को आ गई। मैंने उसे देखा, वो नीले रंग की टॉप और सफ़ेद रंग की स्कर्ट पहन कर आई थी। मैं तो उसे देखता ही रह गया, क्योंकि आज वो कुछ ज्यादा ही ख़ूबसूरत लग रही थी।
मैंने कहा अन्दर आ जाओ, वो अन्दर आई। वहाँ पर मेरा फ्रेंड भी था, उसने कहा, “अरुण मुझे ज़रा काम है, मैं २ घंटे में आता हूँ।” कह कर वो चला गया अब कमरे में सिर्फ़ मैं और श्वेता ही थे। मैंने उससे कहा, “बैठो श्वेता, मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने के लिए लाता हूँ,” तो उसने कहा, “तुम यहाँ बैठो, मैं लेकर आती हूँ।”
पाँच मिनट के बाद वह चाय लेकर आई। चाय पीने के बाद मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसका हाथ पकड़ कर कहा, “जान, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।” उसने कहा, “जानती हूँ, तभी तो आई हूँ।”
फिर मैंने धीरे से उसके कान में कहा, “जान मैं तुम्हें किस करना चाहता हूँ,” तो उसने कहा, “ठीक है, कर लो, लेकिन ज़्यादा कुछ नहीं करना” तो मैंने “ठीक है” कहते हुए उसके नाज़ुक होठों पर अपने होंठ रख दिए और किस करने लगा। वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। तभी मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा, तो उसने मेरा हाथ हटा दिया। मैंने फिर से अपना हाथ उसकी चूचियों पर रखा, अबकी बार उसने कुछ नहीं किया। मैं समझ गया वह गरम हो रही है।
अब मैंने अपना एक हाथ उसकी …
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Jul/090
काम भी अपना- दाम भी अपने
प्रेषक - संदीप
मैं आपको अपना सच्चा अनुभव सुनाता हूँ जो मुझे हमेशा याद रहेगा। एक बार मेरी दोस्त ने कहा, “कुछ काम है।”
.मैंने पूछा - “बोल, क्या काम है?”
“मुझे कुछ पैसों की ज़रूरत है।” - उसने बताया।
पर मेरे पास उस समय पैसे तो थे नहीं, और वह मेरी अच्छी दोस्त थी। तो मैंने कहा, “ठीक है, मैं कहीं से लाकर देता हूँ।”
तो उसने कहा, “किसी से लेने की ज़रूरत नहीं है, मैंने उसका भी इन्तज़ाम भी कर लिया है, बस तू मेरा एक काम कर दे।”
“तुम्हारे लिए तो जान भी हाज़िर है, तू बोल तो सही।”
“मेरी एक दोस्त है जो तुम्हें पैसे दे देगी, पर तुझे उसकी प्यास बुझानी पड़ेगी।
“ये भी कोई बात है, पैसे भी, मज़े भी। इसके लिए कौन मना करता है।”
“तो शाम को मेरे कमरे पर आ जाना।” उसने कहा।
मैं शाम को उसके कमरे पर गया। कुछ देर बाद ही उसके दरवाज़े पर किसी ने खटखटाया। मैं समझ गया कि मेरी ग्राहक आ गई है। मेरी दोस्त ने दरवाज़ा खोला तो सामने एक बला की ख़ूबसूरत लड़की खड़ी थी। उसे तो देखते ही मेरी लंड एकदम खड़ा हो गया। मैं मन-ही-मन सोचने लगा, क्या क़िस्मत है, ऐसे माल को तो कोई भी उल्टे पैसे देकर भी नहीं छोड़ेगा। फिर वो अन्दर आ गई। मेरी दोस्त ने कहा कि मुझे कुछ काम है, मैं एक-दो घंटे में आ जाऊँगी। तब तक तुम लोग अपना …
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